आखिरी पन्ना – तुझे मिला क्या

दिल की दास्तां सुन आसमां भी लजा गया

चाँद में दाग हैं ये बता कर तुझे मिला क्या

खुली आँखों से देखे थे जो ख्वाब कभी

उन सपनों को तोड़ कर तुझे मिला क्या

टूटे हुये दिल का दर्द तो कुछ भी नहीं

पर विश्वास की डोर तोड़ तुझे मिला क्या

मैं प्यार में कब पड़ा था तेरे जबकि

प्यार का अहसास करा कर तुझे मिला क्या

जो रिश्ता अभी तक बन भी नहीं पाया

उसे रिश्ते को मिटा कर तुझे मिला क्या

हासिल नहीं मुझे कुछ भी मगर

मेरा स्वाभिमान गिरा कर तुझे मिला क्या

अभी मैं ज़िन्दगी जीना सीख रहा था

मुझे जिन्दा जला कर तुझे मिला क्या !

http://www.adhivaktaekdayari.wordpress

Wrriten by me date on 03/01/2018

इस नये साल की मेरी पहली कविता आप सब के

लिये इसी तरह मेरे कविता और गीतों को पढ़ते रहिये

!! धन्यवाद !!

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आखिरी पन्ना – नया वर्ष

बढ़े हर्षो उल्लास से तेरा आगमन हुआ था
अब तो तू बस कुछ पलों का मेहमान हैं
तेरे संग सफर का मजा आया
कुछ ग़मों का निशां बाक़ी रहेगा
कुछ खुशियों का सफ़रनामा बना
अब नये वर्ष का सबको इंतजार हैं
उसके स्वागत के कुछ ख़ास इंतजाम हैं
फिर कुछ उम्मीदों की कहानी बनेगी
कुछ होनी अनहोनी की निशानी बनेगी
यहीं समय की यह अनोखी चाल है
जिन्दगी में कोई पास तो कोई दूर है
जाने वाले का गम कब कोई मनाये
आने वाले कि खुशी में सभी चूर है
जो गया वो कब लौट कर आया हैं
जा तो भी छोड़ कर इस ज़िन्दगी को
पर हूँ मैं खड़ा किसी और के इन्तजार में
कुछ पल की खुशीयां ढूंढ़ता फिर रहा मैं
जो तू ना दे पाया नये वर्ष से माँग रहा मैं
तेरे अन्तिम सांझ में कुछ गुनगुना रहा मैं
नये वर्ष के आगमन में एक गीत गढ़ रहा मैं।

Date on 31/12/2017

Written by me

आँख से पर्दा हटाना क्या

सोते हुए को जगाना क्या
रोते हुए को हँसाना क्या
चेहरे पर चढ़ा रखा हो नक़ाब
तब आँखों से पर्दा हटाना क्या।

उन बातों का समझाना क्या
जिन बातों का कोई दोष नहीं
अब रिश्ते को निभाना क्या
जब विश्वास की डोर नहीं

उन्हें छोड़ कर जाना क्या
जिस दिल में अपना अहसास नहीं
अब जख्मों में मलहम लगाना क्या
जब दूजा कोई हिस्सेदार नहीं

Written by me on date 29/12/2017

मैं चुका नहीं अभी

थका नहीं हूँ बस थोड़ा थम सा गया था

चुका नहीं हूँ बस थोड़ा रुक सा गया था

हारा नहीं हूँ बस थोड़ा बहक सा गया था

भूला नही हूँ रास्ता अभी मंजिल का

बस टूट कर बिखर सा गया था

बिखरें हुए ख़्वाब को फिर से समेटे रहा हूँ

राह हैं नहीं असां पर मुझे अब फिर से दौड़ना हैं

कांटों की चुभन है तो क्या हुआ

फूलों की चादर तक पहुंचना हैं

हैं यकीं मुझे खुद पर पा लूँगा मैं मंजिल

चूम कर तेरा मस्तक सपने को हकीकत बना दूंगा

ये अहंकार नही हैं मेरा

खुद के हौसलें पर हमें है पूरा यकीं

मैं चुका नहीं अभी बस थोड़ा रुक सा गया था।

हूँ अभी जिन्दा…

कुछ ख्वाहिशें थी अभी जिन्दा

मैं मरा नहीं, हूँ अभी जिन्दा

जो कभी कहते हुए थकते नहीं थे हमसे

तुम्हारी रूह से रूह तलक का साथ हैं अपना

मेरे घरौंदे को रेत सा बिखेर कर चले गए

मेरे मरने से पहले ही जिन्दा जलाकर चले गए

मेरे होठों की मुस्कान आने से पहले

आँखों का काजल आसुंओ से धो कर चले गए

मेरी सांस थमने से पहले वो दामन छुड़ाकर चले गए

ख़्वाब आँखों मे पले थे जो कभी एक जैसे

उन्हें नींद का हिस्सा बता कर चले गए

मेरी ख्वाहिशें पूरी हुई नही अभी

मेरे मरने से पहले ही वो मेरी चिता जलाकर चले गए

मैं मरा नहीं, हूँ अभी जिन्दा ।

Written by Me on date 10/12/2017

इतना ही बहुत

जिंदगी ये है प्यारी बहुत,

जी लेने दे मुझको स्वाभिमान से,

कुछ ज्यादा मांगा नही तुमसे

जबकि ख्वाहिशें है अधूरी मेरी बहुत

कोई पूछे नही कभी मेरी खुशी,

मेरी चाहते पूछा तुमने इतना ही बहुत

किसने बांटे किसी के गम यहाँ,

तूने मेरे आँसूवों संग खेला इतना ही बहुत…!

Written by me on date 09/12/2017

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